Month: August 2022

  • भावाबहिणीचं नातं निसर्गसारखं ! पद्मश्री राहीबाई पोपेरे यांनी बनवल्या बीजराख्या





    भावाबहिणीचं नातं निसर्गसारखं ! पद्मश्री राहीबाई पोपेरे यांनी बनवल्या बीजराख्या | Hello Krushi
































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  • महागठबंधन की सरकार बनने से पेट में दर्द हो रहा, अपने प्लान में फेल होने पर तिलमिलाने लगे, डिप्टी CM तेजस्वी का भाजपा पर प्रहार

    लाइव सिटीज पटना: बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला है. तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन की सरकार बनने से भाजपा के पेट में दर्द हो रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को नहीं तोड़ पाए और अपने प्लान में फेल होने पर तिलमिलाने लगे हैं. मंत्रिमंडल विस्तार पर डिप्टी सीएम तेजस्वी ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का अधिकार है,जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा. वहीं सीबीआई-ED की कार्रवाई पर तेजस्वी यादव ने बीजेपी को चुनौती देते देते हुए कहा कि ED-CBI से हमलोग डरने वाले नहीं हैं. जितना दम लगाना है लगा लें. साथ ही उन्होंने कहा कि हम तो सीबीआई ED को न्यौता देते हैं कि आओ मेरे घर में दफ्तर खोल लो.

    डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार की पार्टी को नहीं तोड़ पाए और अपने प्लान में फेल होने पर बीजेपी के नेता तिलमिलाने लगे हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी के शीर्ष नेतृव की ओर से बिहार बीजेपी के नेताओं को टास्क दिया गया था. तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी के शीर्ष नेतृव ने नेताओं से कहा कि हमने तुम्हें नीतीश जी को खत्म करने का काम दिया था. समाजवादी, क्षेत्रीय दलों को खत्म करने का काम दिया था. विधायकों को तोड़ने का खरीदने का, तुमने वह काम क्यों नहीं किया. उससे नाराज होकर इन लोगों को झाड़ पड़ा है. जब झाड़ पड़ा है तो हाथ से लेकर सब हिल डोल रहा है. तेजस्वी ने कहा कि 2015 में जब सरकार में आने का मौका मिला तब हमलोगों ने 18 महीने में ही खूब किया हमारे किसी भी मंत्री पर एक भी दाग नहीं लगा.

    क्या तेजस्वी यादव को सीबीआई-ED से डर नहीं लगता है?. इस सवाल पर तेजस्वी यादव ने कहा कि जब हम पहली बार विधायक बने, डिप्टी सीएम बने जब हम बिहार के लिए काम कर रहे थे. जब नए-नए थे तब सीबीआई के लोगों ने मुकदमा किया. कितने साल हो गए, क्या हुआ, कुछ नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि कुछ गलती किए होते तो कोर्ट सजा दे ही ना देती. खैर इस चीज पर हमको टीका टिपण्णी नहीं करना है. इ सब मुकदमा किया, जब मेरा मूंछ भी नहीं हुआ था, जब हम क्रिकेट खेलते थे. हमने क्या गलत काम किया. साथ ही तेजस्वी यादव ने जांच एजेंसियों को चुनौती देते हुए कहा कि हम तो सीबीआई ED को न्यौता देते हैं कि आओ मेरे घर में दफ्तर खोल लो. तब जाकर शांति होगी अगर उससे भी शांति नहीं मिली तो हम क्या कर सकते हैं.

    बीजेपी के लोग आरजेडी के विधायाकों को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे?. इस सवाल पर डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि पूरे देश में क्या हो रहा है, आप लोगों को पता नहीं है. उन्होंने कहा कि हमलोग जनता के लिए चिंतित रहते हैं. काम में विश्वास करते हैं. जबकि बीजेपी हमेशा तोड़ने का काम करती है. कई राज्यों में क्या हुआ है, देख नहीं रहे हैं. डिप्टी सीएम ने कहा कि बीजेपी का चाल चरित्र और चेहरा उजागर हो गया है. तेजस्वी यादव ने कहा कि हमने पहले भी कहा है कि जो डरेगा उसके पीछे सीबीआई, इनकम टैक्स लगा दो और जो बिकेगा उसके लिए रकम फिक्स कर दीजिए. उन्होंने कहा कि ललन सिंह ने एक-एक कर सारी बातों को आप लोगों के सामने बताया ही है. आज बिहार के हर जनता के चहरे पर मुस्कान है.

    तेजस्वी यादव से जब यह पूछा गया कि गठबंधन टूटने से एक दिन पहले बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव लगातार आपको फोन कर रहे थे. इस पर तेजस्वी यादव ने इसका जवाब तो नहीं दिया लेकिन साफ तौर पर यह कहा कि अब हमारे नेता नीतीश कुमार हैं. महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार हैं और नीतीश कुमार जिस तरह से महागठबंधन को चलाएंगे, उस तरह से सारी बातें होंगी. इससे पहले तेजस्वी यादव ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि उम्मीद है कि वे हर बिहारवासी की उम्मीदों पर खरे उतर सकेंगे. गरीबों की समस्याओं का समाधान करने के प्रयास किए जाएंगे. वहीं डिप्टी सीएम पद की शपथ लेते ही तेजस्वी यादव ने ऐलान किया था कि राज्य में एक महीने के भीतर युवाओं के लिए बंपर नौकरियां निकाली जाएंगी.

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  • एक शेत-4 पिके, या तंत्राची लागवड करून मिळवा बंपर नफा





    एक शेत-4 पिके, या तंत्राची लागवड करून मिळवा बंपर नफा | Hello Krushi
































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  • अधिक नफा मिळवण्यासाठी सप्टेंबर महिन्यात करा ‘या’ पिकांची लागवड





    अधिक नफा मिळवण्यासाठी सप्टेंबर महिन्यात करा ‘या’ पिकांची लागवड | Hello Krushi
































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  • CM नीतीश के मन में PM बनने की अकुलाहट, आरोप लगाने वाले अपने गिरेबान में झांकें, जनता इनके साथ पलटी मारेगी, बीजेपी का हमला

    लाइव सिटीज पटना: बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार टूटने के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बन गई है. नीतीश कुमार ने आठवीं बार सीएम पद की शपथ ली तो वहीं तेजस्वी यादव दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बने हैं. एनडीए गठबंधन टूटने के बाद अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. जेडीयू के आरोपों पर बीजेपी जवाब दे रही तो बीजेपी के आरोपों पर जेडीयू का जवाब आ रहा है. गुरुवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता तारकिशोर प्रसाद ने नीतीश कुमार और आरजेडी पर हमला बोला है. तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि नीतीश कुमार के मन में जब-जब प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब आता है तब-तब इस तरह की बात करते हैं. क्योंकि प्रधानमंत्री बनने की एक अकुलाहट है.

    तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि जिस तरह से नीतीश कुमार पलटी मारते गए हैं ऐसे में आने वाले समय में बिहार की जो जनता है वो इनके साथ पलटी मारेगी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का सर्वांगीण विकास, सबका साथ सबका विकास अभियान चल रहा है. लगातार केंद्र का सहयोग इस राज्य को भी मिल रहा था. हम जिन मुद्दों को लेकर सरकार में हम आए बिहार की महान जनता के साथ जो हमारा कमिटमेंट है उसे अंजाम तक पहुंचाएंगे. इसके लिए सदन से सड़क तक विकास की बात करनी है. सड़क पर भी जाना होगा तो निश्चित तौर पर जाएंगे. सदन में भी मजबूती से अपनी बातों को रखेंगे.

    पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि आश्चर्य लगा कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवारों के खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए गए. यह आरोप आधारहीन है. उल्टा उन्होंने जो हमारे तीन उम्मीदवार हैं उनके खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए. गोह विधानसभा क्षेत्र में जिस तरह से उन्होंने मनोज शर्मा के खिलाफ रणविजय सिंह को उम्मीदवार बनाया, उसी प्रकार से कैमूर में रिंकी पांडेय के खिलाफ प्रमोद पटेल को उम्मीदवार बनाया. इसके अलावा बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र (गोपालगंज) से मिथिलेश तिवारी के खिलाफ में मंजीत सिंह को उम्मीदवार बनाकर उन्हें हराने का काम किया. आज ये तीनों जनता दल यूनाइटेड के राज्य और जिलों के पदाधिकारी बने हैं. तारकिशोर ने कहा कि इस तरह के आरोप लगाकर जिस तरह से उन्होंने अपनी बात कही है उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए.

    इससे पहले सीएम नीतीश कुमार ने बीजेपी के आरोपों पर कहा कि वह कभी उपराष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे. बिना बीजेपी का नाम लिए नीतीश ने कहा कि जिसको जो बोलना है, बोलने दीजिए. आपने एक आदमी (सुशील मोदी) को यह कहते सुना कि मैं उपराष्ट्रपति बनना चाहता था. क्या मजाक है! यह फर्जी है. मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं थी. क्या वे भूल गए कि हमारी पार्टी ने हाल ही में संपन्न हुए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों में कितना समर्थन किया था? उन्हें मेरे खिलाफ बात करने दें. साथ ही सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि विपक्ष एकजुट होकर आगे बढ़ेगा. हम बिहार में जनता की सेवा करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि महागठबंधन मजबूती के साथ काम करेगी.

    बता दें कि नीतीश और तेजस्वी की सरकार का 24 अगस्त को सदन में फ्लोर टेस्ट होगा. जहां उन्हें बहुमत साबित करना होगा. सीएम और डिप्टी सीएम तो तय हो गया है लेकिन बिहार के नए मंत्रिमंडल की तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है. सरकार में कौन-कौन शामिल होगा, किसके कितने मंत्री बनेंगे, यह सब अभी तय नहीं हुआ है. हालांकि माना जा रहा है कि महागठबंधन में इस बात पर सहमति बन रही है कि 5 विधायक पर एक मंत्री बनाया जाएगा. बतातें चलें कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने राज्यपाल फागू चौहान को 164 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा है. इसमें जेडीयू के 45, आरजेडी के 79, लेफ्ट के 16, कांग्रेस के 19, निर्दलीय एक और हम के चार विधायक शामिल हैं.

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  • इस दिन होगा नीतीश-तेजस्वी मंत्रिमंडल का विस्तार, महागठबंधन की सरकार में सभी मंत्रियों के नाम लगभग तय, CM ने दी जानकारी

    लाइव सिटीज पटना: बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बन गई है. नीतीश कुमार ने आठवीं बार सीएम पद की शपथ ली तो वहीं तेजस्वी यादव दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बने हैं. अब ऐसे में नीतीश कुमार की नयी कैबिनेट का विस्तार कब होगा और उसका स्वरूप कैसा होगा इसको लेकर चर्चा तेज हो गयी है. इस बीच बिहार कैबिनेट के विस्तार को लेकर सीएम नीतीश कुमार ने बड़ी जानकारी दी है. सीएम नीतीश ने बताया कि बिहार कैबिनेट का विस्तार 15 अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस के बाद होगा. सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार संभवत: 16 अगस्त को या उसके बाद हो सकता है. ऐसे में माना जा रहा है कि 15 अगस्त के बाद किसी भी दिन इस पर मुहर लग सकती है.

    सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि विपक्ष एकजुट होकर आगे बढ़ेगा. हम बिहार में जनता की सेवा करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि महागठबंधन मजबूती के साथ काम करेगी. सीएम ने बीजेपी के आरोपों पर कहा कि वह कभी उपराष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे. बिना बीजेपी का नाम लिए नीतीश ने कहा कि जिसको जो बोलना है, बोलने दीजिए. आपने एक आदमी (सुशील मोदी) को यह कहते सुना कि मैं उपराष्ट्रपति बनना चाहता था. क्या मजाक है! यह फर्जी है. मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं थी. क्या वे भूल गए कि हमारी पार्टी ने हाल ही में संपन्न हुए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों में कितना समर्थन किया था? उन्हें मेरे खिलाफ बात करने दें.

    बताया जा रहा है कि महागठबंधन की नयी सरकार में जो कैबिनेट तय होगा, उसका फॉर्मूला 2015 के आधार पर तय होगा. इसके मुताबिक पांच विधायक पर एक मंत्री बनाये जायेंगे. नीतीश सरकार में अधिकतम 36 मंत्री बनाये जा सकते हैं. राजद विधानसभा में 79 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. फॉर्मूले के तहत राजद के 15 मंत्री बन पायेंगे. जबकि 10 मंत्री जदयू से भी बनाये जायेंगे. जबकि कांग्रेस को 3 या 4 पद मिल सकता है, वहीं जीतन राम मांझी की पार्टी हम पिछली सरकार की तरह ही इस सरकार में भी एक सीट लेने में सफल होगी. वहीं नीतीश कुमार की नयी कैबिनेट में निर्दलीय विधायक सुमित सिंह को भी फिर से मंत्री बनने का अवसर मिल सकता है. बताया जा रहा है कि भाजपा कोटे के मंत्रियों के मिले विभाग राजद कोटे के मंत्रियों को दिया जायेगा.

    RJD कोटे से संभावित मंत्रियों की सूची:
    तेजप्रताप यादव, कुमार सर्वजीत, अख्तरुल इस्लाम शाहीन, आलोक कुमार मेहता, ललित यादव, अनिता देवी, जितेन्द्र कुमार राय, अनिल सहनी, चन्द्रशेखर, भाई वीरेन्द्र, भारत भूषण मंडल, शाहनवाज, समीर महासेठ, वीणा सिंह, रणविजय साहू, सुरेन्द्र राम, सुनील सिंह/केदार सिंह, बच्चा पांडेय/राहुल तिवारी, कार्तिक सिंह/सौरभ कुमार

    JDU कोटे से संभावित मंत्रियों की सूची:
    बिजेंद्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, संजय झा, लेसी सिंह, सुनील कुमार, जयंत राज, जमा खान, अशोक चौधरी
    कांग्रेस कोटे से संभावित मंत्री:
    मदन मोहन झा, अजीत शर्मा, शकील अहमद खान, राजेश कुमार राम
    जीतनराम मांझी की पार्टी हम (से) कोटे से संतोष कुमार सुमन और निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह भी एक बार फिर मंत्री बन सकते हैं.

    बता दें कि नीतीश और तेजस्वी की सरकार का 24 अगस्त को सदन में फ्लोर टेस्ट होगा. जहां उन्हें बहुमत साबित करना होगा. सीएम और डिप्टी सीएम तो तय हो गया है लेकिन बिहार के नए मंत्रिमंडल की तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है. सरकार में कौन-कौन शामिल होगा, किसके कितने मंत्री बनेंगे, यह सब अभी तय नहीं हुआ है. हालांकि माना जा रहा है कि महागठबंधन में इस बात पर सहमति बन रही है कि 5 विधायक पर एक मंत्री बनाया जाएगा. बतातें चलें कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने राज्यपाल फागू चौहान को 164 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा है. इसमें जेडीयू के 45, आरजेडी के 79, लेफ्ट के 16, कांग्रेस के 19, निर्दलीय एक और हम के चार विधायक शामिल हैं.

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  • पशुपालकांना दिलासा ! पशुधनाला वाचवण्यासाठी लम्पी प्रो लस सुरू : कैलास चौधरी





    पशुपालकांना दिलासा ! पशुधनाला वाचवण्यासाठी लम्पी प्रो लस सुरू : कैलास चौधरी | Hello Krushi































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  • सुशील मोदी के आरोपों का सीएम नीतीश ने दिया जवाब, कहा- एडजस्टमेंट चाह रहे, स्पीकर जो चाहे करें

    लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बिहार विधानसभा में शहीद दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव समेत कई नेता इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे. इस ललन सिंह भी मौजूद थे. सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने शहीद दिवस के अवसर पर  शहीद स्‍मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किया.

    जब कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम बाहर निकले तो मीडिया ने बीजेपी के आरोपों पर सवाल कर डाला. नीतीश कुमार ने अपने पुराने सहयोगी पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी की तरफ से किए गए खुलासे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुशील मोदी बीजेपी में एडजस्टमेंट के लिए बयानबाजी कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने सुशील मोदी की तरफ से नीतीश कुमार के द्वारा उपराष्ट्रपति का पद मांगे जाने की बात खारिज की.

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  • वीरांगना फूलन देवी की 59 वीं जयंती पर विशेष : सामाजिक न्याय की ‘देवी’ फूलन देवी

    वीरांगना फूलन देवी की 59 वीं जयंती पर विशेष : सामाजिक न्याय की ‘देवी’ फूलन देवी

    ● बागी से सांसद बनी फूलन देवी शोषितों की राजनेता थी
    ● वीरांगना फूलन देवी ने चंबल से लेकर संसद तक तय किया सफर

    लेखक :- साहित्यकार राकेश बिहारी शर्मा, महासचिव साहित्यिक मंडली शंखनाद

    अंतरराष्ट्रीय फलक पर दस्यु सुंदरी नाम से ख्यात फूलन देवी का असली नाम फुलवा था। विश्व की 16 क्रांतिकारी महिलाओं में फूलन देवी का नाम चौथे स्थान पर है। आपने काफी महिलाओं और उनसे जुड़े किस्सें-कहानियों के बारें में पढ़ा होगा या सुना भी होगा लेकिन आज जिस महिला की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं अगर आप उनके बारें में नहीं जानतें तो यकीन मानिए यह आलेख आपको हैरान कर देगा। जी हां, हैरान और परेशान कर देने वाली कहानी है उस औरत की जिसने अपने उम्र के हर पड़ाव पर एक नयीं दास्तां लिख डाली। जिसके लिए औरत होना जीवन भर एक श्राप की तरह रहा लेकिन इस औरत की ज़िद और ताकत ने अपने दुश्मनों की सांसे ज्यादा समय तक नहीं चलने दी। तो, आईए जानते है आखिर कौन थीं ये निर्भीक महिला और कैसी रही इनकी ज़िंदगानी। यह कहानी है वीरांगना फूलन देवी की।
    माता जानकी जी को उठा ले जाने वाले दैत्येंद्र रावण की लंका जलाई जाती है, उसे श्रीराम द्वारा मारा जाता है और उसके बाद आज भी बुराई का प्रतीक मानकर दैत्येंद्र रावण का पुतला जलाया जाता है। दूसरी तरफ एक पिछड़े, लाचार समाज की बेटी फूलन को बलात उठा ले जाकर जातिवादी गुंडे बलात्कार करते हैं, गांव में नंगा घुमाते हैं, सालों-साल अत्याचार करते हैं, फिर भी उनकी लंका कोई नहीं जलाता। फिर वही औरत जब हथियार उठाती है, उनकी लंका भी जलाती है और उनका पुतला भी। लेकिन ये औरत सामाजिक न्याय की ‘देवी’ नहीं कहलाती, ये ‘डकैत फूलन देवी’ कहलाती है।
    जहां सहनशीलता की सीमा समाप्त होती है, वहीं से क्रांति का उदय होता है। आताताइयों ने जब जुल्म की हदें पार कर दीं तो पूर्व सांसद फूलन देवी ने उनके विनाश के लिए हथियार उठा लिया। उन्होंने क्रांति का बिगुल फूंकते हुए जालिमों को मौत की नींद सुलाने का काम किया। हम सभी को फूलन के संघर्ष और वीरता पर गर्व है।

    फूलन देवी का जन्म और परिवारिक जीवन

    कभी चंबल घाटी में अपने आतंक से बड़े-बड़ों की चूलें हिला देने वाली दस्यु सुंदरी फूलन देवी को पहली राजनैतिक महिला डाकू कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। ठाकुरों के प्रति बेहद तल्ख रही फूलन देवी को चंबल इलाके के एक ठाकुर राजनेता की बदौलत ही राजनीति के शीर्ष तक जाने का मौका मिला। फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी थाना पुरवा (गोरहा) गांव में हुआ था। फूलन के पिता का नाम देवी दीन और माता का नाम मूला देवी केवट जो मल्लाह जाति के थे। फूलन देवी बैंडिट क्वीन के नाम से चर्चित थीं। जब फूलन 11 साल की थीं तो उनके चचेरी भाई ने उनकी शादी पुट्टी लाल नाम के एक बूढ़े आदमी से करवा दी। दोनों में उम्र का एक बड़ा फासला होने के कारण दिक्कतें आती रहती थीं। फूलन का पति उन्हें प्रताड़ित करता रहता था। जिसकी वजह से परेशान होकर फूलन देवी ने पति का घर छोड़ कर अपने माता पिता के साथ रहने का फैसला किया।

    गैंगरेप के बाद फूलन बनीं डकैत

    फूलन देवी जब 15 साल की थीं तब श्रीराम ठाकुर के गैंग ने उनका गैंगरेप किया। इतना ही नहीं यह गैंगरेप उन्होंने फूलन के माता-पिता के समाने किया। फूलन देवी ने कई जगह न्याय की गुहार लगाई लेकिन उन्हें सिर्फ निराशा का सामना करना पड़ा। नाराज दबंगों ने फूलन का चर्चित दस्यु गैंग से कहकर अपहरण करवा लिया। डकैतों ने लगातार 3 हफ्तों तक फूलन का रेप किया। जिसकी वजह से फूलन बहुत ही कठोर बन गईं। अपने ऊपर हुए जुल्मों सितम के चलते फूलन देवी ने अपना एक अलग गिरोह बनाने का फैसला किया। हालात ने ही फूलन देवी को इतना कठोर बना दिया कि जब उन्होंने बहमई में एक लाइन में खड़ा करके 22 ठाकुरों की हत्या की तो उन्हें ज़रा भी मलाल नहीं हुआ। बदला लेने के लिए फूलन ने 14 फरवरी 1981 को कानपुर के बेहमई में ठाकुरों को मौत की नींद सुला दिया था। तब से फूलन के प्रति ठाकुरों में नफरत है, लेकिन, यह भी सच है कि बेहमई कांड के बाद एक ठाकुर ने ही फूलन देवी की कदम दर कदम मदद की थी और उन्हें राजनीति का ककहरा पढ़ाया था।
    बिना मुकदमा चलाये ग्यारह साल तक जेल में रहने के बाद फूलन को 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रिहा कर दिया। ऐसा उस समय हुआ जब दलित और कमजोर वर्ग के लोग फूलन के समर्थन में गोलबंद हो रहे थे और फूलन इस समुदाय के प्रतीक के रूप में देखी जाती थी। फूलन ने अपनी रिहाई के बाद बौद्ध धर्म में अपना धर्मातंरण किया।

    फूलन देवी का आत्मसमर्पण और राजनीतिक जीवन

    फूलन देवी एक ऐसा नाम जिसने ना केवल डकैती की दुनिया में बल्कि सियासत के गलियारों में भी खूब नाम कमाया। फूलन देवी ने 1983 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर 10 हजार लोगों और 300 पुलिस वालों के सामने आत्म समर्पण कर लिया। उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा। आत्मसमर्पण करने के बाद फूलन देवी को 8 सालों की सजा दी गई। फूलन के जेल से छूटने के बाद उम्मेद सिंह से उनकी शादी हो गई। जेल से छूटने के बाद ही उन्होंने राजनीति में एंट्री ली। वह दो बार चुन कर संसद पहुंची। पहली बार वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर मिर्जापुर से सांसद बनी थीं।
    इलाके के प्रभावशाली ठाकुर नेता जसवंत सिंह सेंगर ने बेहमई कांड के बाद फूलन देवी जब गैंग के साथ जंगलों में दर-दर भटक रही थीं तब सेंगर साहब ने ही महीनों उन्हें शरण दी। उन्होनें खाने पीने से लेकर अन्य संसाधन भी उपलब्ध करवाए थे। फूलन भी जसवंत सिंह की काफी इज्जत करती थीं। जसवंत के कहने पर बतौर सांसद फूलन ने क्षेत्र में कई विकास के काम करवाए थे। चंबल के बीहड़ से उत्तर प्रदेश की राजनीति में दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने जो कर दिखाया, वो न उनसे पहले किसी ने किया और न ही आगे कोई कर सकता है।
    चंबल की धरती पर कभी अंग्रेजों और सिंधिया स्टेट के अन्याय के खिलाफ हथियार उठाने वाले बागियों से लेकर मौजूदा समय में अपहरण को उद्योग बनाने वाले डाकुओं की कहानियां बिखरी पड़ी हैं। पुलिस की नजर में ये डकैत बर्बर अपराधी हैं, लेकिन वे अपने इलाके में रॉबिनवुड हैं। अपनी जाति के हीरों हैं, अमीरों से पैसा ऐठना और गरीबों खासकर अपनी जाति के लोगों की मदद करना इनका शगल है, लेकिन दुश्मनों और मुखबिरों के साथ ये ऐसा बर्बर रवैया अपनाते हैं कि देखने वालों के दिल दहल जाएं। पुलिस भी मानती है कि जिस जाति का व्यक्ति अपराध कर डाकू बन जाता है उसे उस विशेष जाति समुदाय के लोग अपना हीरो मानने लगते हैं, उसके साथ नायक जैसा व्यवहार करते हैं। यह परंपरा आज की नहीं है, जब से यहां डाकू पैदा हुए तब से चली आ रही है। यही कारण है कि मानसिंह से लेकर दयाराम गडरिया और ददुआ तक अपनी जाति के हीरो रहे। डाकुओं की पैदा करने में प्रतिष्ठा, प्रतिशोध और प्रताड़ना तो कारण हैं ही लेकिन सबसे अहम भूमिका पुलिस की होती है। चंबल के दस्यु सरगनाओं का इतिहास देखें तो डाकू मानसिंह से लेकर फूलन देवी तक सभी लोग अमीरों या रसूख वाले लोगों के शोषण के शिकार रहे हैं और इस शोषण में पुलिस और व्यवस्था ने इनकी बजाय रसूखवालों का ही साथ दिया। ऐसे में ये लोग न्याय की उम्मीद किससे करें। इसके कई उदाहरण है, जिनमें कभी चंबल में पुलिस की नाक में दम करने वाले पूर्व दस्यु सरगना मलखान सिंह भी शामिल हैं। कहा जाता है कि गांव के सरपंच ने मंदिर की जमीन पर कब्जा कर लिया और विरोध करने पर उन्होंने मलखान सिंह के खिलाफ फर्जी केस दर्ज कर जेल भिजवा दिया और फिर विरोध करने वाले मलखान सिंह के एक साथी की हत्या भी कर दी। सरपंच तब के एक मंत्री का रिश्तोदार था जिसके घर पर दरोगा और सिपाही हाजिरी बजाते थे। ऐसे में वह किससे न्याय मागता। बंदूक उठाने के अलावा उसके पास कोई रास्ता ही नहीं था। जगजीवन परिहार को डकैत बनाने के लिए तो पुलिस ही जिम्मेदार थी। वह पुलिस का मुखबिर था, निर्भय गूजर को मारने के लिए पुलिस ने जगजीवन को हथियार मुहैया कराया और डाकू बना दिया। ऊपर से दबाव या फिर डाकू के पकड़े जाने पर भेद खुल जाने के डर से पुलिस वाले इनका इनकाउंटर कर देते हैं और फिर एक दूसरा गैंग तौयार करवा देते हैं। पुलिस भी मानती है कि इनकाउंटर स्पेस्लिस्ट लोगों की इसमें खास भूमिका होती है। ऐसे लोग जब एक गैंग को मार गिराते हैं तो उनकी चहलकदमी बंद हो जाती है। ऐसे में वे दूसरा गैंग तौयार कर देते हैं।
    चंबल में डकैत समस्या के पनपने के लिए कहीं न कहीं यहां की प्राकृतिक संरचना भी जिम्मेदार है। चंबल के किनारे के मिट्टी के बड़े-बड़े टीले डाकुओं की छुपने की जगह है, अगर सरकार इन्हें समतल कर लोगों में बांट दे तो इससे न केवल डाकू समस्या पर लगाम लग सकती है, बल्कि लोगों को खेती के लिए जमीन मिल जाएगी, लेकिन टीलों के समतलीकरण की योजना भ्रष्टाचार की वजह से परवान नहीं चढ़ पा रही है। यही कारण है कि डाकुओं के अलावा अब चंबल में नक्सली भी सक्रिय हो रहे हैं। पुलिस भी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नक्सलियों का प्रशिक्षण शिविर कहां चल रहा है। शोषण और बेरोजगारी ही दस्यु समस्या की तरह नक्सल समस्या की भी जड़ है, अगर इस समस्या से निपटना है तो गांवों में विकास की गंगा बहानी हागी। लोगों को शिक्षा के साथ ही रोजगार भी मुहैया कराना होगा, अन्यथा चंबल का दायरा घटने के बजाय पूरे देश को अपनी गिरफ्त में ले लेगा और देशभर में ऐसे बागियों की जमात पैदा हो जाएगी, जो देश के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगी।1996 में फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत गईं। मिर्जापुर से सांसद बनीं। चम्बल में घूमने वाली अब दिल्ली के अशोका रोड के शानदार बंगले में रहने लगी। फूलन 1998 में हार गईं, पर फिर 1999 में वहीं से जीत गईं।

    रॉबिनवुड क्रांतिकारी फूलन देवी का निधन

    25 जुलाई 2001 को संसद का सत्र चल रहा था। दोपहर के भोजन के लिए संसद से फूलन 44 अशोका रोड के अपने सरकारी बंगले पर लौटी। बंगले के बाहर सीआईपी 907 नंबर की हरे रंग की एक मारुति कार पहले से ही खड़ी थी। 25 जुलाई 2001 को ही शेर सिंह राणा फूलन से मिलने आया। इच्छा जाहिर की कि फूलन के संगठन ‘एकलव्य सेना’ से जुड़ेगा। जैसे ही फूलन घर की दहलीज पर पहुंची। तीन नकाबपोश अचानक कार से बाहर आए और फूलन पर ताबड़तोड़ पांच गोलियां चलाई। एक गोली फूलन के माथे पर जा लगी। गोलीबारी में फूलन देवी का एक गार्ड भी घायल हो गया था। इसके बाद हत्यारे उसी कार में बैठकर फरार हो गए। उसने कहा कि मैंने बेहमई हत्याकांड का बदला लिया है। 14 अगस्त 2014 को दिल्ली की एक अदालत ने शेर सिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अपने कुल 38 साल के जीवन में फूलन की कहानी भारतीय समाज की हर बुराई को समेटे हुए है और फूलन देवी की जीवनी प्रत्येक नारी के लिए प्रेरणा श्रोत बनीं। फूलन ने जुल्म के खिलाफ सभी को लड़ने का संदेश दिया।

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    पावसाळ्यात जनावरांना स्पायडर लिलीच्या विषबाधेचा धोका | Hello Krushi































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