Month: August 2022

  • राजनीतिक बदलाव की ओर बढ़ रहा बिहार! जेपी नड्डा के बयान को लेकर जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष ने कह दी बड़ी बात

    लाइव सिटीज, पटना: बिहार में सियासी हवा अचानक से बदल गई है. भाजपा को छोड़कर शेष सभी दलों के विधायकों और सांसदों की अगले 48 घंटे में पटना में बैठक होनी है. खासकर जदयू सांसदों की मंगलवार को होने वाली बैठक काफी अहम है. कयासबाजी लगने लगी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ बड़ा निर्णय लेंगे. हो सकता है कि वे एनडीए में जदयू के भविष्य को लेकर नेताओं से चर्चा करें और किसी बड़े राजनीतिक बदलाव पर निर्णय लें. 

    इसपर जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि संगठन को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं. सीएम नीतीश अभी जनता दरबार लगा रहे हैं. हमलोग जनता के लिए काम कर रहे हैं. कयासबाजी लगने लगी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ बड़ा निर्णय इस सवाल पर जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि अबी ऐसी कुछ बात नहीं है. जो कयास लगाया जा रहा है, ऐसा कोई बात नहीं है. लेकिन उमेश कुशवाहा ने कुछ ना कह कर बहुत कुछ कह दिया है. उनेश कुशवाहा ने सीधे-सीधे जेपी नड्डा को टारगेट कर दिया है. मीडिया के सवालों से बचते-बचते भी उन्होंने बहुत कुछ कह दिया है

    जेपी नड्डा के क्षेत्रीय पार्टी को खत्म कर देने वाली बयान पर जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि जेपी नड्डा ने कहा कि सब क्षेत्रिए पार्टी समाप्त हो जाएगी. एक दूसरे पर हमला करना ठीक नहीं हैं. NDA घटक दल में हमलोग भी है, सपर सोचना चाहिए. जेपू नड्डा के इस बयान पर बहुत दुख हुआ है. हमलोग सबका वजूद है. हमसब के नेता सीएम नीतीश हैं. उनके नेतृत्व में बिहार में सरकार चल रही है. सीएम नीतीश जो 16 साल में काम किया है, वे ऐतिहासिक है. पूर्व में बिहार की हालत बहुत ही खराब थी. अब बिहार में तेजी से विकास हो रही है. सीएम नीतीश के नेतृत्व में बिहार में सुशासन की सरकार चल रही है.

    आपको बता दें की रविवार देर शाम नीतीश कुमार की कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी से फोन पर हुई बातचीत ने राजनीतिक बदलाव की हवा को और ज्यादा तेजी दे दी. ऐसे में मंगलवार को जदयू की होने वाली बैठक में सीएम नीतीश क्या निर्णय लेते हैं यह बेहद अहम होगा.

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  • Finally The Seedless Guava Discovered; Research Of A Farmer In Sangli





    Finally The Seedless Guava Discovered; Research Of A Farmer In Sangli
































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  • सोनपुर पशु मेला | बिहार का अन्वेषण करें

    सोनपुर पशु मेला

    विश्व प्रसिद्ध सोनपुर पशु मेला हर साल नवंबर-दिसंबर के दौरान आयोजित किया जाता है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है जहाँ बड़ी संख्या में हाथी मिल सकते हैं। प्रमुख आकर्षण कई हाथियों का नजारा है, जिन्हें बिक्री के उद्देश्य से खूबसूरती से सजाया गया है।

    बिहार का अन्वेषण करें

    मेले में हाथियों के अलावा बड़ी संख्या में मवेशी और घोड़े भी बिक्री के लिए लाए जाते हैं। सोनपुर मेले में कुत्तों, भैंसों, गधों, टट्टू, फारसी घोड़ों, खरगोशों, बकरियों और यहां तक ​​कि कभी-कभार ऊंटों की सभी नस्लों से कई खेत जानवर खरीदे जा सकते हैं। पक्षियों और मुर्गी की कई किस्में भी उपलब्ध हैं।

    सोनपुर पशु मेले के मैदान में कई स्टॉल भी लगाए गए हैं। इन स्टालों में आपको कपड़ों से लेकर हथियार और फर्नीचर, खिलौने, बर्तन और कृषि उपकरण, गहने और हस्तशिल्प तक कई तरह के सामान मिल जाएंगे। मेले में विभिन्न लोक कार्यक्रम, खेल और बाजीगर देखे जा सकते हैं।

    मेले की उत्पत्ति प्राचीन काल में हुई थी जब मगध शासक चंद्रगुप्त मौर्य (340 ईसा पूर्व – 298 ईसा पूर्व) गंगा नदी के पार हाथी और घोड़े खरीदते थे।

    मेला कार्तिक पूर्णिमा के दिन शुरू होता है और एक पखवाड़े से अधिक समय तक चलता है।

    यह मेला फ्रांस, इटली, अमेरिका, जापान, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कजाकिस्तान, ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल जैसे देशों से अंतर्राष्ट्रीय आगंतुकों को आकर्षित करता है।

  • सोनपुर, बिहार में घूमने के स्थान

    सोनपुर बिहार आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व के बहुत सारे स्थान प्रदान करता है।

    हरिहर नाथ मंदिर

    यह भगवान हरिहरनाथ का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है और गज (हाथी) और ग्रह (मगरमच्छ) की लड़ाई का स्थल है जब भगवान विष्णु ने कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर में पूर्णिमा के दिन) के दिन गज को बचाया था। इसी वजह से सोनपुर को हरिहर क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है।

    प्राचीन मंदिर समय के साथ नष्ट हो गया था, वर्तमान मंदिर का निर्माण मुगल काल के एक राजा राजा राम नारायण द्वारा किया गया था।

    कार्तिक पूर्णिमा पर, भक्त गंगा और गंडक नदी के संगम पर पवित्र स्नान करने के लिए इकट्ठा होते हैं और भगवान हरिहरनाथ की पूजा करते हैं।

    संगम

    यह गंगा और गंडक नदियों का संगम है। गंडक नदी नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियरों से निकलती है। नदी नेपाल को बहाती है, रॉयल चितवन राष्ट्रीय उद्यान (नेपाल), वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (बिहार) से होकर गुजरती है और अंत में सोनपुर में गंगा नदी में मिल जाती है। इसे गंडकी, काली गंडकी या नारायणी नदी के नाम से भी जाना जाता है।

    प्राचीन संस्कृत महाकाव्य महाभारत में नदी का उल्लेख है और इसके विकास का वर्णन पवित्र शिव पुराण में किया गया है।

    गंडक नदी नेपाल तराई से मगध तक बुद्ध और उनके अनुयायियों की आवाजाही का मार्ग रही होगी, यही कारण है कि नदी के तट पर अशोक के स्तंभों सहित कई स्तूप और इसी तरह की संरचनाएं पाई जाती हैं।

    भगवान हरिहरनाथ का मंदिर दो नदियों के संगम के पास स्थित है। मेही नामक एक अन्य नदी भी संगम के पास गंगा से मिलती है।

    सोनपुर रेलवे स्टेशन

    सोनपुर जंक्शन भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक है। इसमें 2,415 फीट (736 मीटर) की लंबाई के साथ दुनिया का 8 वां सबसे बड़ा रेलवे प्लेटफॉर्म है। इसके निर्माण के समय यह विश्व में दूसरा सबसे बड़ा था।

    सोनपुर पूर्व मध्य रेलवे के छह मंडलों में से एक है।

    मवेशी मेला

    विश्व प्रसिद्ध सोनपुर पशु मेला हर साल नवंबर-दिसंबर के दौरान आयोजित किया जाता है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है जहाँ बड़ी संख्या में हाथी मिल सकते हैं। प्रमुख आकर्षण कई हाथियों का नजारा है, जिन्हें बिक्री के उद्देश्य से खूबसूरती से सजाया गया है।

    मेले में हाथियों के अलावा बड़ी संख्या में मवेशी और घोड़े भी बिक्री के लिए लाए जाते हैं। सोनपुर मेले में कुत्तों, भैंसों, गधों, टट्टू, फारसी घोड़ों, खरगोशों, बकरियों और यहां तक ​​कि कभी-कभार ऊंटों की सभी नस्लों से कई खेत जानवर खरीदे जा सकते हैं। पक्षियों और मुर्गी की कई किस्में भी उपलब्ध हैं।

    सोनपुर पशु मेले के मैदान में कई स्टॉल भी लगाए गए हैं। इन स्टालों में आपको कपड़ों से लेकर हथियार और फर्नीचर, खिलौने, बर्तन और कृषि उपकरण, गहने और हस्तशिल्प तक कई तरह के सामान मिल जाएंगे। मेले में विभिन्न लोक कार्यक्रम, खेल और बाजीगर देखे जा सकते हैं।

    मेले की उत्पत्ति प्राचीन काल में हुई थी जब मगध शासक चंद्रगुप्त मौर्य (340 ईसा पूर्व – 298 ईसा पूर्व) गंगा नदी के पार हाथी और घोड़े खरीदते थे।

    मेला कार्तिक पूर्णिमा के दिन शुरू होता है और एक पखवाड़े से अधिक समय तक चलता है।

    यह मेला फ्रांस, इटली, अमेरिका, जापान, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कजाकिस्तान, ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल जैसे देशों से अंतर्राष्ट्रीय आगंतुकों को आकर्षित करता है।

    स्थानिय बाज़ार

    स्थानीय बाजार बहुत समृद्ध है जहाँ बहुत सारे हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाकृतियाँ, स्मृति चिन्ह, कपड़े, पालतू जानवर, फर्नीचर मिल सकते हैं।

    अन्य

    नेपाली मंदिर, काली मंदिर और सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व के कई अन्य स्थान इस क्षेत्र में स्थित हैं

  • सावन की अंतिम सोमवारी को बाबाधाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, लगी 5 किलोमीटर लंबी लाइन

    लाइव सिटीज, पटना: आज सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी है जिसको लेकर बाबा धाम देवघर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है. रविवार की रात 8 बजे से ही भक्त सोमवारी में जल अर्पण करने के लिए कतारबद्ध होना शुरू कर चुके थे. कांवरियों की कतार देवघर से 5 किलोमीटर दूर नंदन पहाड़ तक जा पहुंची है.

    जल और बेलपत्र से बाबा भोले को जलार्पण करने से सभी मनोकामना की पूर्ति होती है. आज श्रावणी मेला की चौथी सोमवारी है और इस कारण देवघर में भक्तों का जन सैलाब सा दिख रहा है. पूरा शहर ही कांवरियों की भीड़ से पटा हुआ है. एक अनुमान के मुताबिक आखिरी सोमवारी को तकरीबन 2 लाख से ज्यादा भक्त बाबाधाम में जल अर्पण करेंगे. इसको लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए है.

    पहली सोमवारी को समुद्र मंथन से अचस्सरवा घोड़ा,  दूसरी सोमवारी को एरावत हाथी प्राप्त हुआ था  तीसरी सोमवारी को कोस्तुव मणि की प्राप्ति हुई थी और चोथे सोमवारी को लक्ष्मी की प्राप्ति हुई थी, ऐसे में आज का दिन धन अर्जित करने वाला होता है. आज शिव भक्त गंगा जल और बेल पत्र से शिव की अराधना और पूजा कर रहे हैं.

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  • बेटी की इज्जत बचाने के लिए डर दर की ठोकरे खा रहा परिवार, अभी तक नहीं मिला न्याय

    दानापुर से जहां पटना का बेऊर पुलिस और महिला थाना में एक पीड़िता चक्कर काटती रह गई लेकिन कही से न्याय नही मिला जब एसएसपी के पास गई तो वहा से भी सिर्फ आश्वासन मिला करवाही अभी तक नही हुई।

    दरसल ममाला बेऊर थाना क्षेत्र के चिलबिल्लिबगांव का है जहा की एक बेटी के परिवार को इज्जत बचाने के लिए डर डर कर जीना पड़ रहा है और पुलिस से गुहार लगाने के बाद भी न्याय नही मिल रहा है। नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म का प्रयास किया गया तो पीड़ित की मां अपनी बेटी के साथ 4 दिनों से न्याय के लिए थाना का चक्कर काट रही है बेऊर थाना से महिला थाना और महिला थाना से बेऊर थाना का चक्कर लगवाया जा रहा है । इसके बाद पीड़िता ने न्याय के लिए वरीय अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है । जिसके बाद भी अभी तक पुलिस ने कोई ठोस करवाही नही किया है।

    बेऊर थाना की रहनेवाली पीड़िता ने बताया की गांव के ही रहने वाले आदित्य नाम के युवक पर जबरदस्ती बेइज्जत करने का प्रयास किया गया। वही पीड़िता की मां ने बताया की मजदूरी से परिवार चलता है । 3 दिन पहले खेत में काम कर रही थी । उनकी 14 वर्ष की बेटी पानी लेने घर गई । वह घर पहुंची तो बगल के ही एक लड़के ने घर में घुसकर उसके साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया । बच्ची के शोर मचाते ही वह लड़का वहां से भाग गया । शिकायत करने पर आक्रोशित हो गया परिवार इस हादसे से परेशान लड़की ने इस बात की सूचना अपने परिवार के लोगों को दी । सूचना मिलते ही परिवार के लोग आक्रोशित हो गए । इसकी शिकायत लड़के के परिजनों से करने पहुंचे तो वह मारपीट करने को उतारू हो गए ।



    मां ने बताया कि जब वे इसकी शिकायत करने बेऊर थाना पहुंची तो उन्हें महिला थाना का मामला बताकर महिला थाना भेज दिया गया । इसके बाद जब वे महिला थाना गई तो बेउर थाना का मामला बताकर उन्हें वापस भेज दिया गया । जिसके बाद एसएसपी के पास सुरक्षा की गुहार लगाई है ।

    इस मामले को बेउर पुलिस प्रेम प्रसंग का माला बताब्रही है । उन्होंने बताया कि लड़का और लड़की दोनों पक्ष के लोग एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं ।

    बहरहाल कानूनी तौर पर पीड़िता के अकायत पर पुलिस को जांच करनी चाहिए थी वह भी नही हो पाया है।

  • बिहार की सियासत में भूचाल आने वाला है?, JDU और RJD के सभी विधायकों को तुरंत बुलाया गया पटना, मांझी भी कर रहें बैठक

    लाइव सिटीज पटना: आरसीपी सिंह के जेडीयू से इस्तीफे के बाद से बिहार की राजनीति में घमासान मचा हुआ है. बिहार की पॉलिटिक्स में आने वाले कुछ दिन काफी महत्वपूर्ण होने वाला है. दरअसल जदयू और आरजेडी के सभी विधायकों को तुरंत पटना आने को कहा गया है. वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेडीयू सांसदों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह भी मौजूद रहेंगे. रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की बैठक में भी नीतीश कुमार शामिल नहीं हुए. वहीं दूसरी ओर आज यानी रविवार को जेडीयू नेता और बिहार के शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा है कि उनकी पार्टी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी. इसके बाद ललन सिंह ने भी कहा कि मंत्रिमंडल में शामिल होने की क्या जरूरत है. 2019 में नीतीश कुमार का निर्णय था कि हम मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगे. ऐसे में बिहार के सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है. क्या बिहार की सियासत में भूचाल आने वाला है क्या.

    दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 9 अगस्त को जेडीयू सांसदों की बैठक बुलाई है. पार्टी के सभी सांसदों को सोमवार शाम तक पटना आने के लिए कहा गया है. इस बैठक में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह भी मौजूद रहेंगे. बैठक का विषय अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. हालांकि बताया जा रहा है कि बीजेपी का साथ गठबंधन के भविष्य को लेकर चर्चा हो सकती है. वहीं जदयू के साथ ही आरजेडी के सभी विधायकों को तुरंत पटना आने को कहा गया है. वहीं दूसरी ओर 9 अगस्त को HAM विधायक दल की बैठक भी बुलाई गई है. पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के आवास पर यह मीटिंग होनी है. बताया जा रहा है कि मौजूदा सियासी हालात को लेकर बैठक होगी.

    हाल ही में राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने गठबंधन पर कहा कि आज हैं कल किसका भरोसा. उन्होंने कहा कि हम बीजेपी से गठबंधन की बात को नकार नहीं रहे हैं. मगर अभी इस पर बात करने का कोई मतलब नहीं है. जब चुनाव आएंगे तब देखा जाएगा. ललन सिंह ने कहा कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को लेकर एक साजिश रची गई थी, चिराग मॉडल. उसका क्या हश्न हुआ सबको पता है. ललन सिंह ने बीजेपी का नाम लिए बगैर तगड़ा निशाना साधा. उन्होंने कहा, साजिश कौन कर रहा है. सबको पता है. वक्त आएगा तो खुलकर बता देंगे. ललन सिंह ने चिराग मॉडल की तरह एक और मॉडल तैयार किया जा रहा था. जिसको समय रहते समझ कर सही कर लिया गया.

    बता दें कि नीतीश कुमार लगातार बीजेपी के रवैया से नाराज चल रहे हैं. उन्होंने BJP से दूरी बनानी शुरू कर दी. ऐसे कई मौके आए जब नीतीश कुमार को दिल्ली जाना था, लेकिन वे नहीं गए. पहला मौका उस समय आया जब गृह मंत्री अमित शाह ने सभी NDA शासित राज्यों के सीएम को तिरंगा झंडा फहराने के लिए दिल्ली बुलाया था, लेकिन वे नहीं गए. वहीं दूसरा मौका तब आया जब पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के विदाई समारोह में नीतीश कुमार को निमंत्रण दिया गया था, लेकिन वो नहीं गए. उसी तरह नई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में भी नीतीश कुमार ने दूरी बनाए रखी. जबकि आज यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की बैठक में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल नहीं हुए. ऐसे में बिहार के सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है. क्या बिहार की सियासत में भूचाल आने वाला है क्या.

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  • सोनपुर, बिहार कैसे पहुंचे?

    सोनपुर बिहार के सारण जिले में स्थित एक शहर है और रेलवे, सड़क मार्ग, जलमार्ग और वायुमार्ग के माध्यम से आसानी से पहुँचा जा सकता है। यह शहर 25.7°N 85.1832°E पर 42 मीटर (137 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। सोनपुर पटना के सामने गंगा नदी के तट पर स्थित है।

    एयरवेज

    निकटतम हवाई अड्डा पटना हवाई अड्डा है जो सड़क मार्ग से सोनपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। पटना निकटवर्ती बड़े शहरों और महानगरों से हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

    रेलवे

    निकटतम रेलवे स्टेशन सोनपुर जं है। यह दुनिया का 8 वां सबसे बड़ा रेलवे प्लेटफॉर्म होने का दावा करता है। यह निर्माण के समय 2,415 फीट (736 मीटर) की लंबाई के साथ दूसरा सबसे बड़ा था।

    रोडवेज

    पटना (25 किमी) से सड़क मार्ग से सोनपुर पहुंचा जा सकता है। बहुत सारी बसें, टैक्सियाँ, तिपहिया और यहाँ तक कि तांगे (घोड़े की गाड़ी) भी हैं।

    जलमार्ग

    हालांकि अनियमित, फिर भी पटना और सोनपुर के बैंकों में नावें उपलब्ध हैं। पर्यटन सीजन के दौरान, बीएसटीडीसी पटना से सोनपुर तक नदी परिभ्रमण का आयोजन करता है।

  • आरसीपी को ABCD भी नहीं पता, ललन सिंह के आरोप पर RCP सिंह का पलटवार, कहा-मुझसे ज्यादा कौन जानता है

    लाइव सिटीज पटना: जदयू से आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में घमासान मचा हुआ है. आरसीपी सिंह जेडीयू से इस्तीफा देने के बाद लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू पर हमलावर हैं. वहीं आरसीपी सिंह के आरोप पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी करारा जवाब दिया है. ललन सिंह ने पटना स्थित पार्टी दफ्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पार्टी का मालिक एक है, जिसका नाम नीतीश कुमार हैं. वहीं आरसीपी सिंह को लेकर कहा कि वह कभी संघर्ष के साथ नहीं रहे. वह केवल सत्ता के साथी रहे. अब आरसीपी सिंह ने एक-एक कर ललन सिंह के हर बयान का जवाब दिया है. आरसीपी सिंह ने कहा कि पानी का जहाज दौड़ता नहीं है, वह तैरता है. ललन सिंह पहले जरा समझ लें, तब बोलें. दरअसल ललन सिंह ने कहा कि जदयू डूबता हुआ नहीं बल्कि दौड़ता हुआ जहाज है.

    जेडीयू और समता पार्टी की आरसीपी की समझ पर ललन सिंह के उठाए सवाल पर आरसीपी ने कहा कि मैंने 1998 से पार्टी में काम किया है. मुझसे ज्यादा कौन जानता है पार्टी को. आरसीपी सिंह ने कहा कि मैं ठोक कर बोलता हूं, नीतीश कुमार ने मुझे मंत्री बनने के लिए कहा था. मैंने खुद से माला नहीं पहना. वहीं ललन सिंह के ‘चिराग मॉडल’ वाले बयान पर आरसीपी ने कहा कि ये कौन कहता है, वो जिसने खुद पार्टी से बाहर के लोगों को लाकर टिकट दिया था. इसीलिए हार मिली थी. आरसीपी सिंह ने ‘तन यहां था, मन कहीं और’ वाले ललन सिंह के बयान पर कहा कि कौन क्या बोलता है, इससे फर्क नहीं पड़ता है. लेकिन राजनीति में कहीं न कहीं तो जाना ही है. क्या वह पार्टी भाजपा भी हो सकती है. इस पर आरसीपी सिंह ने कहा कि कोई भी पार्टी हो सकती है.

    इससे पहले ललन सिंह ने आरसीपी सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि जो कहते है, जदयू डूब जाएगी. आपको पता है, जब जहाज डूबता है तो सबसे पहले कौन भागता है. वो सत्ता के साथी है. इसलिए पार्टी को छोड़कर भाग गए. ललन सिंह ने कहा कि आरसीपी सिंह कभी संघर्ष के साथ नहीं रहे. वह केवल सत्ता के साथी रहे. आरसीपी सिंह के आरोप पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने करारा जवाब देते हुए कहा कि आरसीपी सिंह को तो जाना ही था. क्योंकि उनका तन जदयू में था और मन कहीं और था. साथ ही ललन सिंह ने कहा कि 2020 चुनाव में नीतीश कुमार के खिलाफ एक षड्यंत्र रचा गया था चिराग पासवान के रूप में और अब आरसीपी सिंह के रूप में रचा जा रहा था. ललन सिंह ने कहा कि सत्ता हाथ से चला गया, इसीलिए आरसीपी सिंह बौखला गए हैं.

    ललन सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार भूंजा खाते है उसमें भी आरसीपी को आपत्ति है. भूंजा खाकर ही इतना विकास कर दिए कि आज पूरी दुनिया में नीतीश कुमार के विकास की चर्चा हो रही है. राज्यसभा टिकट नहीं देने के सवाल पर ललन सिंह ने कहा कि राज्यसभा का टिकट नहीं भी मिला था तो संघर्ष करना चाहिए था.उन्होंने कहा कि हमलोग केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल नहीं होंगे क्योंकि 2019 में सीएम नीतीश कुमार ने फैसला लिया था. 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का आरसीपी सिंह का फैसला था. बता दें कि आरसीपी सिंह पर आरोप है कि उन्होंने परिवार के सदस्यों के नाम पर 2013 और 2022 के बीच बड़ी संपत्ति अर्जित की है. शनिवार को जदयू ने अपने कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर अपने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह से स्पष्टीकरण मांगा था.

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  • समता ग्रामीण विकास के तत्वाधान में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजनन

    मनीष कुमार / कटिहार 

    शहर के दुर्गास्थान राजेंद्र ग्राम में जल एवं तालाब संरक्षण विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सामाजिक संस्था समता ग्रामीण विकास के तत्वाधान में आयोजित इस सेमिनार की अध्यक्षता जाने-माने पर्यावरणविद् डॉ० टीएन तारक ने किया उद्घाटन, जबकि डीएस कॉलेज के प्राध्यापक डॉ अनवर इरज, सीताराम चमरिया कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्राचार्य प्रो० अशोक कुमार विश्वास, प्रो० राम निवास शर्मा, प्रो कामेश्वर पंकज, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक पंकज कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ० गंगासागर दीनबंधु ने किया। 

    सेमिनार में विषय प्रवेश कराते हुए समता ग्रामीण विकास के सचिव किशोर कुमार मंडल ने कहा कि बदलते परिवेश में जल एवं तालाब संरक्षण जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति ने प्रकृति को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है। पानी जीवन का आधार है। इसके बगैर स्वस्थ जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसलिए जल एवं तालाब संरक्षण की दिशा में ठोस पहल करने की जरूरत है। सेमिनार में कृष्ण प्रसाद कौशिक,कंचन प्रिया, राधा रमन सिंह, अरुण कुमार चौबे, सुमित वर्मा, कुंदन कुमार आदि ने विचार प्रकट करते हुए नदी व तालाब बचाने तथा जल संरक्षण पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह भूतल का जलस्तर नीचे जा रहा है। इससे जल एवं तालाब को बचाना अत्यंत आवश्यक है। सेमिनार में डीएस कॉलेज के प्राध्यापक प्रो० अनवर इरज ने कहा कि जल संरक्षण के लिए सभी को आगे आने की जरूरत हैं। आने वाले समय में जल को लेकर बड़ा संकट होने वाला है।  सीताराम चमरिया कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्राचार्य प्रो० अशोक ने कहा कि एक समय तालाब एवं जल संरक्षण के लिए कई तरह की पहल की जाती थी। 

    लेकिन अब धीरे-धीरे यह समाप्त होता जा रहा है। जबकि प्रकृति के लिए जल व तालाब को बचाना जरूरी है। कृषि वैज्ञानिक पंकज ने जल संकट के दुष्प्रभाव से अवगत कराते हुए कहा कि मौजूदा दौर में सरकारी अभियान के अलावे जन समुदाय को भी जल संरक्षण के लिए आगे आने की जरूरत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जाने-माने पर्यावरणविद् डॉ० टीएन तारक ने कहा कि जल संरक्षण के लिए सभी को आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस अनुपात में पेड़ पौधा पृथ्वी पर होना चाहिए, उस अनुपात में पेड़ पौधा उपलब्ध नहीं है। इसी कारण वर्षा की कमी होती है तथा जल संकट उत्पन्न होता है। कई उदाहरण के जरिए उन्होंने बताया कि जब तक अधिक से अधिक पौधारोपण नहीं होगा।

    तब – तक पर्याप्त वर्षा नहीं होगी एवं जल संरक्षण संभव नहीं है। उन्होंने पृथ्वी को बचाने व जल संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण पर जोर दिया।इस अवसर पर केबी झा कॉलेज के डॉ कुलभूषण मौर्य, डीएस कॉलेज के डॉ आशीष आनंद, सच्चिदानंद पंडित, चिकित्सक डॉ आशीष कुमार, अनुज कुमार, अजीत कुमार, गौतम कुमार मंडल आदि मौजूद थे।