Adipurush के टीजर पर भड़के रामायण के राम, बोले- अस्था के साथ खिलवाड़ ‘बर्दाश्त’ नहीं करेंगे..


डेस्क : जब से आधिपुरुष का ट्रेलर जारी किया गया है तब से फिल्म विवादों से घिरी हुई है। किरदारों के लुक को लेकर न केवल जनता में बल्कि कई दिग्गज कलाकारों में नाराजगी बनी हुई है। जिसमें लंकापति रावण बने सैफ का लुक लोगों को क्रूर शासक खिलजी से मिलता जुलता प्रतीत हो रहा है।

वहीं, फिल्म में इस्तेमाल किए गए VFX को लेकर भी सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग हो रही है। बात इतनी ही नहीं है सोशल मीडिया पर तो ‘आदिपुरुष’ को लेकर मुहिम शुरू हो गई है। निर्माताओं पर फिल्म पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाए जा रहे हैं।

आदिपुरुष पर जमकर बरसे अरुण गोविल :

आदिपुरुष पर जमकर बरसे अरुण गोविल : ओम राउत की फिल्म ‘आदिपुरुष’ को लेकर खुद ऐतिहासिक किरदार निभा रहे सेलेब्स भड़क रहे हैं। कुछ दिन पहले सीता का किरदार निभा चुकी दीपिका चिखलिया ने भी ट्रेलर की निंदा की थी। जिसके बाद अब राम का किरदार निभा चुके अरुण गोविल ने भी इस पर अपना रिएक्शन दिया है। अरुण गोविल ने अपने ऑफिशियल यूट्यूब चैनल एक वीडियो शेयर करते हुए आदिपुरुष पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने आगे कहा- ‘बहुत समय से मेरे दिमाग में बहुत सी बातें चल रही हैं। लगता है अब उन बातों को आपके साथ साझा करने का समय आ गया है।’

‘आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’ :

‘आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’ : राम के किरदार में आज भी पहचाने, जाने वाले अरुण गोविल कहते हैं “‘रामायण’ और ‘महाभारत’ जैसे जितने भी पौराणिक ग्रंथ और शास्त्र हैं, ये हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर। मानव सभ्यता के लिए नींव है। इसे न हिलाया जा सकता है और न ही बदला जा सकता है और इसके साथ किसी तरह का खिलवाड़ या छेड़छाड़ भी ठीक नहीं है। हमें अपनी संस्कृति और धार्मिक धरोहरों को जैसी वो है वैसी ही रखना चाहिए। उसमें किसी भी तरह का बदलाव किया जाना गलत है। भला कोई अपनी नींव हिलाता है क्या.. कोई अपनी जड़ बदलता है क्या?”

‘न उड़ाएं हमारी भावनाओं का मजाक’ :

‘न उड़ाएं हमारी भावनाओं का मजाक’ : इतना ही नहीं अरुण गोविल ने लोगों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी दूसरे धर्म और उसके मानने वालों की आस्था के साथ छेड़छाड़ नहीं किया जाता, तो फिर हर बार सनातन धर्म के साथ ही ऐसा क्यों होता है? अरुण गोविल बोले- ‘आजकल यह ट्रेंड बन चुका है कि सनातन धर्म की मान्यताओं का मजाक बनाओ, देवी-देवताओं के आपत्तिजनक पोस्टर बनाओ। आखिर आपको हमारी धार्मिक भावनाओं से छेड़छाड़ का अधिकार किसने दिया है? कुछ फिल्ममेकर्स और एक्टर्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर धार्मिक मान्यता का मजाक न उड़ाएं।’

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