Author: Biharadmin

  • E- Shram : क्या आपके Account में ₹1000 नहीं आएं? अगर नहीं तो..यहां जाने कैसे मिलेगा पैसा?


    न्यूज़ डेस्क : ई-श्रम कार्ड धारकों के लिए काम की खबर है। ई-श्रम कार्ड (E-Shram)के तहत असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे कामगारों को भरण-पोषण भत्ता दिया जाता है। इस योजना का लाभ रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा और ठेला चालक, नाई, धोबी, दर्जी, मोची, फल, सब्जी वाले आदि उठा सकते हैं। कार्ड धारकों के खाते में हर महीने 500 रुपये आने की प्रावधान है। मालूम हो कि श्रमिकों के खाते ने 1000 रुपये भेजे भी जा चुके है।

    खातों में ट्रांसफर हो रहे है 1000 रुपए :

    खातों में ट्रांसफर हो रहे है 1000 रुपए : यूपी सरकार ने ई-श्रम कार्ड के तहत लाभान्वित श्रमिकों का आंकड़ा जड़ी किया है। पहली किस्त प्राप्त करने वाले श्रमिकों की संख्या 2 करोड़ से अधिक है। इन सब के खाते में 1000 रुपये भेजे जा चुके हैं। अब अगली किस्त की 500 रुपये भी दिए जाने हैं। यह पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के तहत जमा किया जा रहा है। ऐसे में अगर आपके खाते में पैसे नहीं आए तो इन पांच आसान तरीकों से पेमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं

    लाभान्वितों को मिलेगा यह सुविधा :

    लाभान्वितों को मिलेगा यह सुविधा : इसमें श्रमिकों को 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा मिलता है। वहीं ई-श्रम केके माध्यम से आने वाले समय में लाभार्थियों को पेंशन देने की तैयारी भी चल रही है। इसीके साथ गर्भवती महिलाओं को भरण पोषण हेतु सहायता राशि दिए जाने हैं। इसके अलावा घर बनवाने के लिए धनराशि के साथ-साथ बच्चे की शिक्षा में भी सरकार आर्थिक सहायता करेगी।

    इस प्रकार करें पेमेंट स्टेटस चेक :

    इस प्रकार करें पेमेंट स्टेटस चेक : ई-श्रम पोर्टल (e-Shram Portal) के माध्यम से भत्ता आया कि नहीं यह इन 5 तरीकों से चेक करें। आपके खाते लिंक मोबाइल नंबर मैसेज अच्छे से चेक करें। यदि किसी कारणवश मोबाइल नंबर लिंक न हो तो डाकघर अथवा बैंक से जानकारी प्राप्त करें। वहीं पासबुक की एंट्री करवा कर पेमेंट स्टेटस देख सकतें हैं। इसके अलावा मोबाइल में उपलब्ध गूगल पे, पेटीएम जैसे ऐप के माध्यम से भी खाता चेक किया जा सकता है।

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  • ‘ढेलेदार चमड़ी’ से मारे गए पशुओं के लिए 1.5 करोड़ की सहायता

    हैलो कृषि ऑनलाइन: देश भर में पिछले कुछ महीनों में गांठदार त्वचा रोग तेजी से फैल रहा है। इसलिए पशुपालन को आर्थिक नुकसान हो रहा है। ऐसे में पशुपालन को सरकार से मदद मिल रही है। सतारा जिले में भी इस बीमारी का काफी प्रकोप था। जिले में 590 मृत पशुओं के लिए ढेलेदार खाल ने किसानों के खाते में 1 करोड़ 53 लाख 46 हजार रुपए जमा किए हैं। बाकी किसानों को अगले महीने मदद मिल जाएगी।

    अगस्त के पहले हफ्ते में गांठदार चमड़ी ने राज्य के जलगांव जिले में प्रवेश किया। उसके बाद धीरे-धीरे पूरे राज्य में इस बीमारी का प्रसार बढ़ता गया और पशुओं की मृत्यु दर में भी वृद्धि हुई। राज्य सरकार ने किसानों को वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है और इसे लागू करना शुरू कर दिया है।
    इसके अनुसार दुधारू पशुओं को 30,000 रुपये, सांडों को 25,000 रुपये और एक वर्ष से कम आयु के पशुओं को 16,000 रुपये की मदद की प्रक्रिया शुरू की गई है. जिले में अब तक ग्यारह तालुकों के 197 प्रभावित गांवों में 777 पशुओं की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है. इसमें से 590 मृत पशुओं को अनुदान दिया गया है। शेष 187 किसानों को जल्द ही सहायता राशि मिल जाएगी।


    ‘मेरी गौशाला, स्वच्छ गौशाला’ अभियान

    पशुओं की सुरक्षा के लिए ‘माजा गोठा, स्वच्छ गोठा’ अभियान शुरू किया गया है। शेड को साफ रखने से संक्रामक रोगों से बचा जा सकता है। अभियान को पशुधन को सुरक्षित रखने के अभियान के रूप में एक आंदोलन के रूप में क्रियान्वित किया जायेगा। पशुपालन विभाग ने कहा है कि इस अभियान के प्रति गांव गांव में जागरूकता फैलाई जाएगी।


  • फिर बंद हुआ रामेश्वर जूट मिल

    समस्तीपुर। रामेश्वर जूट मिल फिर बंद हुआ । प्रबंधन और मजदूरों के बीच चल रही थी अनबन, मजदूरों ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप।

    Rameshwar-Jute-Mill
  • LIC का मौज वाला स्कीम! महज 108 रुपये निवेश पर मिलेंगे 23 लाख, जाने पूरी विशेषताएं..


    न्यूज़ डेस्क : आज के समय मे सब यह बात समझते हैं कि भविष्य के लिए पैसा जमा करना काफी जरूरी है। इसके लिए लोग ऐसे कंपनी की तलाश में रहते हैं, जिस पर विश्वास किया जा सके। इसके अलावा निवेशकों की चाहत यह भी होती है कि कम बजत में अधिक लाभ मिले। ऐसेमें LIC आपके लिए सबसे उपयुक्त रहेगा।

    इसी कड़ी में एलआईसी की जीवन आनंद बीमा काफी लोकप्रिय है। इसके तहत आपको मैच्योरिटी पर शानदार रिटर्न के साथ-साथ अजीवन कवर बीमा मिलेगा। इस पॉलिसी के तहत पॉलिसी होल्डर्स की आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यह एक एक लॉन्ग टर्म पॉलिसी है। इसमें 15 से लेकर 35 वर्ष तक का टर्म प्लान चुना जा सकता हैं। बतादें कि इसमें बोनस भी मिलता है। इसे एक लाख रुपये के सम एश्योर्ड के साथ खरीदा जा सकता है।

    सिर्फ रोजाना 108 रुपये का निवेश :

    सिर्फ रोजाना 108 रुपये का निवेश : यह एक छोटी निवेश प्लान है। इस प्लान का हिस्सा सभी वर्गिय लोग बन सकते हैं। इसके लिए पहले रोजाना 111 रुपया बचाना होगा, ऐसे में सालाना प्रीमियम 40611 रुपये होते हैं। वहीं इसके बाद आपको 2.25 फीसदी टैक्स के साथ ऐलान प्रीमियम 39736 रुपये लगेगा, जिसके लिए रोजाना 108 रुपये बचाने होंगे।

    जीवन आनंद बीमा के फायदे :

    जीवन आनंद बीमा के फायदे : इस पॉलिसी के तहत मैच्योरिटी के समय आपको 8 लाख रुपये का सम एश्योर्ड, 9 लाख 93 हजार 600 रुपये का बोनस और 5 लाख 36 हजार रुपये का फाइनल एडिशनल बोनस मिलेगा। इस तरह मैच्योरिटी के समय कुल अनुमानित रिटर्न आपको 23 लाख 29 हजार 600 रुपये मिलेगा। साथ ही 8 लाख रुपये का लाइफ टाइम रिस्क कवर भी मिलेगा।

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  • बीड जिले में अरहर की फसल पर कीट का हमला; किसान चिंतित

    हैलो कृषि ऑनलाइन: महाराष्ट्र का खेतटैक्स के मुद्दे कभी खत्म नहीं होते। पिछले दिनों बेमौसम बारिश से फसलों को काफी नुकसान हुआ था। वहीं, बीड जिले में अरहर की फसल पर कीटों का हमला बढ़ रहा है। भारी बारिश के कारण कुछ किसानों की फसलें बच गईं। लेकिन अब कीड़ों के हमले से फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसानों का कहना है कि जिले में अरहर की फसल खिलने के बाद ही फसलों पर रस चूसने वाले कीड़ों ने हमला किया था। ऐसे में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

    जिले में इस समय अरहर की फसल लहलहा रही है। लेकिन इस वर्ष तुरी में इल्ली के प्रकोप से किसान चिंतित हैं। इस वर्ष जिले के किसानों ने अरहर की खेती पर जोर दिया है। इससे किसानों को अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है। हालांकि फसलों पर कीटों के बढ़ते प्रकोप के कारण किसानों को महंगी दवाओं का छिड़काव करना पड़ रहा है। इसलिए उनकी लागत बढ़ रही है।


    कृषि विभाग द्वारा निर्देशित

    जिले में इस साल हुई बेमौसम बारिश से सोयाबीन, कपास, मक्का और सब्जियों की फसल को भी काफी नुकसान हुआ है. किसानों की बोई हुई फसल पानी में सड़ गई। इन खेती वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक पानी रुके रहने के कारण, अरहर की फसल लीफ-रोलिंग वर्म से प्रभावित होती है। इससे किसान को बचाना चाहिए। कृषि विभाग की ओर से कहा गया कि अरहर की फसल के डंठलों पर उचित दवा का छिड़काव करने से इस रोग के प्रकोप में कमी आएगी।

    मिर्च की फसल पर ब्लॉक थ्रिप्स का आक्रमण

    जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों पर कीड़ों का प्रकोप बढ़ रहा है। मराठवाड़ा और विदर्भ विशेष रूप से प्रभावित हैं। बारिश के बाद फसलें बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं। इसलिए बीड जिले के किसान ज्यादा चिंतित हैं। वहीं, चंद्रपुर जिले में मिर्च की फसल पर काले कीट का प्रकोप बढ़ रहा है। भंडारा जिले में धान की फसल पर कीट के हमले से किसान धान की फसल जला रहे हैं।


  • ड्रग इंस्पेक्टर पर निगरानी की टीम ने मारा छापा; घर से कैश, ज्वेलरी और कई जमीनों के पेपर मिले

    पटना । एक ड्रग इंस्पेक्टर पर निगरानी की टीम ने छापा मारा है। ड्रग इंस्पेक्टर नवीन के घर से कैश और ज्वेलरी मिली है। उनके घर से सोने की कटोरी और चम्मच भी मिला है। बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई जमीनों के पेपर भी मिले है। टीम की कार्रवाई जारी है।

    टीम ने सीतामढ़ी में नवीन कुमार को 2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

    इसके बाद बाद टीम उसे सीतामढ़ी से पटना लेकर आई। पटना आवास पर सर्चिंग शुरू की। यहां पर सोने की कटोरी और चम्मच समेत काफी जेवर मिला।

  • ऋषिकेश में होगा देश का पहला शानदार ग्लास ब्रिज, बीच से गुजरेंगे वाहन..


    डेस्क : ऋषिकेश अपनी खूबसूरती के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। लोग यहां घूमने के लिए देश- विदेश से आते हैं। इस स्थान को लोग राम और लक्ष्मण झूले में सवारी को लेकर भी जानते हैं। इसी के साथ अब ऋषिकेश में देश का पहला ऐसा ग्लास ब्रिज बनेगा, जिस पर लोग आवाजाही करेंगे। जी हां इस ग्लास ब्रिज से लोग एक स्थान से दूसरे स्थान जाएंगे देश के कई अन्य जगह ग्लास ब्रिज है।

    लेकिन यहां पर्यटक सिर्फ कुछ देर के लिए ही नजारा देखने के लिए जाते हैं लेकिन ऋषिकेश वाले ब्रिज से होते हुए आवाजाही शुरू की जाएगी। पुल निर्माण से जुड़े कार्य जोरों पर है। ग्लास ब्रिज का निर्माण करने वाले कंपनी लोक निर्माण विभाग के अनुसार जुलाई 2023 तक स्कूल को बनाकर तैयार कर लिया जाएगा।

    ऋषिकेश में गंगा नदी के ऊपर तैयार किए जा रहे क्लास ब्रिज अपने आप में मनमोहक होगा। इस ब्रिज से आसपास के दृश्य को बखूबी देखा जा सकेगा। इस ब्रिज का नाम “हनुमान सेतु” रखा गया है। जी हां राम और लक्ष्मण जी के नाम से झूला पहले से स्थित है। ऐसे में हनुमान सेतू लोगों को अपनी और भी श्रद्धा से आकर्षित करेगा। इस ग्लास ब्रिज को तीन लेन में तैयार किया जा रहा है। ब्रिज के दोनों तरफ से पैदल यात्री ग्लास पर चलेंगे। वहीं बीच में पुल निर्माण किया जाएगा, जिस पर छोटी गाड़ियां चलेंगी।

    ये हैं ग्लास ब्रिज का ढांचा

    ग्लास ब्रिज काफी मजबूती से बनाया जा रहा है। इस ब्रिज को बनाने में 65 एमएम के शीशे का इस्तेमाल किया जाएगा। पुल गंगा नदी से करीब 57 मीटर की ऊंचाई पर होगा। कांच का पुल करीब 133 मीटर लंबा होगा। यह पुल कुल 8 मीटर चौड़ा होगा, जिसमें पैदल यात्री कांच का पुल और वाहन पुल दोनों शामिल हैं।

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  • एक ओर कपास की कीमत बढ़ रही है; दूसरी ओर, कवक ‘अल्टरनेरिया’ का आक्रमण

    हैलो कृषि ऑनलाइन: कपास वह फसल थी जिसने पिछले साल सबसे अधिक कीमत प्राप्त की थी। इस साल भी किसानों को कपास के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है लेकिन कपास उत्पादकों को खेतएक नया संकट मंडरा रहा है। भारी बारिश के बावजूद कपास की स्थिति संतोषजनक रही। किसानों को उम्मीद थी कि दो-तीन चुनाव होंगे। लेकिन कपास पर अचानक कवक रोग ‘अल्टरनेरिया’ का आक्रमण हो गया। इससे फूल, पत्ते प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए एक खेत में कपास के उखड़ने का खतरा है, कृषिविदों ने व्यक्त किया। साथ ही आज कई क्षेत्रों में तस्वीर देखने को मिल रही है।

    कपास वर्तमान में अच्छी थी। इसलिए किसानों को उम्मीद थी कि कपास से सोयाबीन में हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो जाएगी। अब अचानक कपास पर ‘अल्टरनेरिया’ कवक रोग का प्रकोप बढ़ गया। तो अच्छी स्थिति में कपास लाल, पीली दिखती है। यह प्रचलन किसी एक क्षेत्र विशेष में नहीं है, अपितु सर्वत्र देखने को मिलता है। इस महामारी के कारण किसान अधिक संकट में हैं।


    कपास की कीमत में वृद्धि के साथ, किसानों को मौसम की सबसे बड़ी मार का सामना करना पड़ सकता है यदि एक फसल में कपास खो जाती है। दिलचस्प बात यह है कि सभी जिलों में फफूंद का प्रकोप देखा गया है। इस साल खरीफ सीजन की शुरुआत से ही किसान एक के बाद एक संकटों का सामना कर रहे हैं। सीजन खत्म होते ही संकटों का सिलसिला जारी है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कपास की लेट ब्लाइट किसानों के लिए कमर तोड़ने वाली साबित होगी।

    इस रोग का परिणाम

    -बीमारी के प्रकोप से कपास के पत्ते झड़ रहे हैं


    -पत्ती कार्बन अपटेक प्रक्रिया को धीमा करके पौधे पर प्रभाव

    – पत्ते गिरने के बाद नए फूल, पत्ते आने की संभावना बहुत कम होती है


    – कपास लाल, पीली दिखती है

    अल्टरनेरिया’ नामक कवक रोग कपास पर अचानक से बढ़ जाता है। कुछ क्षेत्रों में प्रेक्षणों के अनुसार, कपास एक सप्ताह के भीतर समाप्त हो जाएगी। नए फूल और पत्ते आने की संभावना कम होती है। कवकनाशी के छिड़काव से इस रोग से बचा जा सकता है।


    – डॉ. प्रमोद यादगीरवार, वैज्ञानिक, संभागीय कृषि अनुसंधान केंद्र, यवतमाल


  • LPG Cylinder के नियम में हुआ बड़ा बदलाव – अब हर नागरिकों को मिलेगा 3 गुना फायदा, जानें – कैसे ?


    न्यूज डेस्क : LPG गैस सिलेंडर हमारे घरों में एक विशेष वस्तु के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसके बिना हम घर में अनाज होते हुए भी भोजन से वंचित रह सकते हैं। ऐसे में एलपी से जुड़े खबरों में लोगों की दिलचस्पी अधिक होती है यदि आप भी एलपीजी घरेलू गैस सिलेंडर का कनेक्शन लिया है तो आपके लिए अच्छी खबर है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से गैस सिलेंडर में क्यूआर कोड को लॉन्च कर दिया गया है। इस के माध्यम से आप सिलेंडर को कहीं से भी ट्रैक और ट्रेस कर पाएंगे।

    एलपीजी गैस सिलैंडर होगा ट्रैक

    एलपीजी गैस सिलैंडर होगा ट्रैक

    इंडियन ऑयल (IOCL) के चेयरमैन श्रीकांत माधव वैद्य ने बताया कि अगले तीन महीने में सभी घरेलू गैस सिलेंडर पर क्यूआर कोड होगा। विश्व एलपीजी सप्ताह 2022 के अवसर पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह बदलाव क्रांतिकारी साबित हो सकती है होगी अब लोग गैस सिलेंडर को ट्रैक कर सकेंगे।

    बताया कि क्यूआर कोड के जरिए ग्राहक सिलेंडर के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, सिलेंडर को कहां रिफिल किया गया है और सिलेंडर से संबंधित कौन से सुरक्षा परीक्षण किए गए हैं। मौजूदा सिलेंडर पर लेबल के जरिए क्यूआर कोड चिपकाया जाएगा, जबकि नए सिलेंडर पर वेल्ड किया जाएगा।

    QR कोड वाले 20 हजार ए‍लपीजी स‍िलेंडर लॉन्च

    QR कोड वाले 20 हजार ए‍लपीजी स‍िलेंडर लॉन्च

    पहले चरण में यूनिट कोड आधारित ट्रैक के तहत क्यूआर कोड वाले 20,000 एलपीजी सिलेंडर जारी किए गए। बता दें कि यह एक तरह का बारकोड होता है, जिसे डिजिटल डिवाइस से पढ़ा जा सकता है। पुरी ने कहा कि अगले तीन महीने में सभी 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर क्यूआर कोड लगा दिया जाएगा।

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  • यात्रीगण ध्यान दें! बेगूसराय से गुजरने वाली कई ट्रेनें हुई रद्द, यात्रा से पहले चेक कर ले स्टेटस..


    डेस्क : अगर आप भी हाल ही में बेगूसराय स्टेशन से कहीं यात्रा पर निकल रहे हैं तो सबसे पहले ट्रेन के वर्तमान स्थिति को जांच लें। क्योंकि, बढ़ते ठंड और कोहरे को देखते हुए भारतीय रेलवे ने कई महत्वपूर्ण को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही कई ट्रेनों को सप्ताह में आंशिक तौर पर रद्द कर चलाया जाएगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 तक अप 15621 आनंद विहार- कामाख्या और डाउन 15622 एक्सप्रेस को पूर्णतः रद्द कर दिया गया है।

    इसके साथ ही 15903 डिब्रूगढ़-चंडीगढ़ एक्सप्रेस और 15904 चंडीगढ़ डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस आगामी 2 दिसंबर माह से फरवरी माह के अंत तक रद्द कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं कई अन्य ट्रेनों के परिचालन में भी रेलवे में फेरबदल की घोषणा की है। अवध असम एक्सप्रेस अप 15909 हर शनिवार को दिसंबर माह से फरवरी माह तक रद्द रहेगी। वहीं, डाउन 15910 दिसंबर से फरवरी माह तक हर मंगलवार को रद्द रहेगी।

    वही, 12505 कामाख्या आनंद विहार टर्मिनल नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस 2 दिसंबर से लेकर 26 फरवरी तक हर बुधवार शुक्रवार और रविवार को रद्द रहेगी। वहीं 12506 आनंद विहार टर्मिनल से कामाख्या जाने वाली नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस 4 दिसंबर से 28 फरवरी तक मंगलवार शुक्रवार और रविवार को रद्द रहेगी।

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